बातों-बातों मे…. बुजुर्गों का सम्मान

शंकालू – मुंशीजी, पिछल दिनों अंतर्राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस मनाया गया। यह दिवस मनाने का उद्देष्य क्या है? मंुशीजी – शंकालू, हमारी भारतीय दिवस में बुजुर्ग दिवस मनाने की अवधारणा नहीं थी। क्योंकि भारतीय समाज में माता-पिता की देखभाल और सेवा का दायित्व तो संतानों पर ही होता है। लेकिन पाष्चात्य सभ्यता में यह अवधारणा नहीं है। वहां मातृ और पितृ देवो भवः की अवधारणा नहीं है, क्योंकि पष्चिमी देषों में स्त्री और पुरूष दोनों अपने जीवनकाल में कई-कई जीवन साथी बदलते है। किसी स्त्री के एक के बाद एक…

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बलात्कार पर राजनीति

देष के अनेक राज्यों में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार का सिलसिला जारी है। चाहे उत्तर प्रदेष हो, चाहे राजस्थान इन दोनों राज्यों में शासन और प्रषासन की ह्रदयहीनता और संवेदना शून्यता शर्मसार करने वाली है। पिछले 15 दिनों के दौरान उत्तर प्रदेष में हाथरस सहित 5 जगहों पर बलात्कार की वारदातें हुई है। राजस्थान में बलात्कार की घटना पर मुख्यमंत्री कहते है कि लड़कियों की मर्जी से उनका यौन शोषण हुआ है। जबकि यौन शोषण को लेकर पुलिस में मामला दर्ज हुआ है। उधर हाथरस में एक…

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बातों-बातों मे…. हत्या और राजनीति

शंकालू – मुंशीजी, देष में बलात्कार और हत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण क्या हैं? मंुशीजी – शंकालू, कारण एक नहीं अनेक है। समाज में भौतिक सुखों की अंधी दौड़ और धर्म तथा आस्था के नाम पर बढ़ता पाखण्ड इसका मुख्य कारण है। अगर समत्वबुद्धि तथा विवेष से भौतिकता की मीमांसा की जाये तो भौतिकता बुरी नहीं हैै। यह भी हमारे जीवन का अंग है। समस्या इसलिए पैदा हुई कि बहुतायत समाज ने भौतिकता को ही सम्पूर्ण जीवन मान लिया है। इसलिए आध्यत्मिकता को तिलांजलि देकर…

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मीडिया में अवमूल्यन

मीडिया को भारतीय लोकतंत्र का चैथ स्तंभ कहा जाता है। इसमें सच्चाई भी है। जिस राजनीति के ज़रिये हमारी शासन व्यवस्था संचालित होते है उसमें खामियों और चूक की गुंजाइष रहती है। इसी कारण प्रेस को ‘वाॅच डाॅग‘ यानी निगरानीकर्ता कहा जाता है। पिछले 70 साल के दौरान हमारे प्रिंट मीडिया ने कई बार अपनी कारगर भूमिका निभाई जिसके चलते सरकारों को जाना पड़ा। इससे यह प्रमाणित हो गया कि यदि सजग मीडिया नहीं होता तो शासन निरंकुषता का पर्याय बन जाता है। भारत ही नहीं पूरी दुनिया में स्वतंत्र…

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बातों-बातों मे…. हत्या, बलात्कार और सियासत

शंकालू – मुंशीजी, हमारे देष के एक नहीं उनके राज्यों में हत्या और बलात्कार की घटनाएं तेज़ी से बढ़ रही है। आप किसे जिम्मेवार मानते है? मंुशीजी – शंकालू, तुम्हारा सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेष, राजस्थान, उडीसा, मध्यप्रदेष, छत्तीसगढ़, पंजाब आदि राज्यों में इस तरह के अपराध बढ़ते जा रहे हैं। इसके एक नहीं कई कारण है। लेकिन सबसे बड़ा कारण है राजनीतिक विद्वेष। जो राजनीतिक दल सत्ता से दूर हैं। वे ऐसी घटनाओं को गुप्त समर्थन करते हैं। सहानुभूति का ड्रामा करते हुए इन्हें वोट बैंक की फिक्र…

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धर्म और षिक्षा

हमारी भारतीय संस्कृति सनातन पद्धति की देन है। पूरी दुनिया में जब मानव सभ्यता का स्वरूप विकसित हुआ तो सबसे पहले आध्यात्मिक चेतना का सूत्रपात भारत भूमि से हुआ। हमारे ऋषि-महर्षि अपने समय के ऐसे वैज्ञानिक थे जिनकी कार्य पद्धति, आध्यात्म पर आधारित थी। आध्यात्मिक साधना, तप और कर्मयोग से हमारे ऋषियों ने ईष्वरी शक्ति का अनुभव प्राप्त कर सनातन धर्म की अवधारणा को मूर्त रूप दिया। यही कारण है कि दुनिया में बाद में मे जितने भी धर्म और मज़हब हुए उनमें कल्याणकारी तत्व वैसे ही हैं जैसा सनातन…

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बातों-बातों मे…. आतंकवाद का भयानक चेहरा

शंकालू – मुंशीजी, आज पूरी दुनिया में आतंकवाद पैर पसार चुका है। आगे मानवता के सामने कितनी बड़ी चुनौती है? मंुशीजी – शंकालू, पूरी दुनिया में आतंकवाद की जड़ में दिषाहीन कट्टरवादी इस्लामिक सोच है। इस्लाम में आज कट्टरपंथियों और दहषगर्दों का बोल-बाला है। इस वर्ग ने इस्लाम की कल्याणकारी सोच को तिलांजलि देकर राजनीतिक षड़यंत्र के तहत मज़हब का दुरूपयोग किया है। इन दहषतगर्दों ने पूरी दुनिया में अपना जाल फैला लिया है। कट्टरवादी सोच के इस आतंकी मुसलमानों ने अपने दिलो-दिमाग में यह भ्रम स्थायी रूप से जमा…

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लव जिहाद और धर्म परिवर्तन

हरियाणा राज्य के बल्लगढ़ में काॅलेज की छात्रा निकिता की एक सनकी मुस्लिम यवुक तौसीफ़ ने जिस तरह सरेआम गोली मारकर हत्या की उससे यह तो स्पष्ट हो गया है कि हमारे देष में अपराधी प्रवृत्ति पर अंकुष लगाने के सारे प्रयास व्यर्थ साबित हो रहे हैं। जो बातें सामने आयी है वह चैंकाने वाली है। मुस्लिम युवक निकिता के पीछे वर्षोगं से पड़ा हुआ था। दो वर्ष पहले उसने लड़की का अपहरण किया लेकिन दबाव में छोड़ना पड़ा। पुलिस में मामला दर्ज हुआ था, लेकिन समझौते के नाम पुलिस…

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