बातों-बातों मे…. आतंकवाद का भयानक चेहरा

शंकालू – मुंशीजी, आज पूरी दुनिया में आतंकवाद पैर पसार चुका है। आगे मानवता के सामने कितनी बड़ी चुनौती है?
मंुशीजी – शंकालू, पूरी दुनिया में आतंकवाद की जड़ में दिषाहीन कट्टरवादी इस्लामिक सोच है। इस्लाम में आज कट्टरपंथियों और दहषगर्दों का बोल-बाला है। इस वर्ग ने इस्लाम की कल्याणकारी सोच को तिलांजलि देकर राजनीतिक षड़यंत्र के तहत मज़हब का दुरूपयोग किया है। इन दहषतगर्दों ने पूरी दुनिया में अपना जाल फैला लिया है। कट्टरवादी सोच के इस आतंकी मुसलमानों ने अपने दिलो-दिमाग में यह भ्रम स्थायी रूप से जमा लिया है कि विष्व में केवल इस्लाम ही सबसे श्रेष्ठ धर्म है। इसलिए गैर मुस्लिम लोग काफ़िर है। जबकि इस्लाम में कााफ़िर शब्द की सटीक व्याख्या है। जो अधर्मी यानी नास्तिक हो वही काफ़िर है। पैगम्बर साहब की नसीहतों में स्पष्ट है कि इस्लाम का पालन करे, लेकिन दूसरे धर्मांे का सम्मान भी करे। लेकिन इस बात को आतंकी सोच ने तिलांजलि दे दी है। कट्टरपंथी आतंकियों ने यह मान लिया है कि पूरी दुनिया में केवल मुसलमानों का ही शासन होना चाहिए। यही खतरनाक सोच पूरी दुनिया के लिए चुनौती है।

शंकालू – मुंषीजी, भारत में आतंकवाद जो रूप मौजूद है, उसके लिए कौन जिम्मेवार है?
मुंशीजी – शंकालू, 1947 में देष के आज़ाद होने से पहले अंग्रेजों ने बड़ी साजिष के तहत हिन्दू-मुस्लिम एकता के ताने-बाने मे विघटन का बीजारोपण किया। जिन्ना को भड़का कर अलग मुस्लिम देष की मांग करवा दी। गांधी जी ने भरसक प्रयास किया कि देष का बंटवारा न हो। लेकिन पंडित नेहरू की पदलोलुपता के चलते देष का विभाजन हुआ। लाखो हिन्दुओं का कत्लेआम हुआ। धर्म के नाम पर नफ़रत के बीज उसी समय बो दिए गए। आज़ादी के तुरंत बाद पाकिस्तानी कबीलाई समूहों के साथ जम्मू-कष्मीर पर कब्जा की कोषिष हुई। एक बड़ा हिस्सा आज भी पाकिस्तान के कब्जे में है। उस युद्ध में जब भारतीय सेना आगे बढ़ने लगीे तो पंडित नेहरू ने एक तरफा युद्ध विराम घोषित कर दिया। जम्मू-कष्मीर को विषेष राज्य का दर्जा देकर धारा 370 का अस्थाई प्रावधान कर दिया। इसी की आड़ में जम्मू-कष्मीर में पाकिस्तान की शह में इस्लामिक आतंकवाद ने अपनी जड़े जमा ली।

शंकालू – मुंषीजी, जम्मू-कष्मीर के आतंकवाद के लिए 70 सालों के दौरान कांग्रेस का शासन कितना जिम्मेवार है?
मुंशीजी – ये बात सही है कि पंडित नेहरू के प्रधानमंत्रित्व काल में धारा 370 का प्रावधान कर तुष्टीकरण की राजनीति के तहत भूल हुई। लेकिन जब शेख अब्दुल्ला ने गिरगिट की तरह अपना रंग बदले हुए अलगावादी तेवर दिखाए तो कांग्रेस सरकार ने उन्हें 10 वर्षों तक जेल में बंद रखा। उस समय कांग्रेस कुछ सुधी नेताओं को यह आभास हो गया कि उनसे कितनी बड़ी भूल हुई थी। अलगाववाद की जड़े जम्मू-कष्मीर में लगातार मज़बूत हुई। इंदिरा गांधी के शासन में कई बार बड़े उठाए गए, लेकिन ज्यों-ज्यों दवा हुई मर्ज़ बढ़ता ही गया। उसके बाद पिछले तीन दषकों में जो भयावह दृष्य, देखने को मिला है उसे हम सभी जानते है। 1990 के दषक में घाटी से कष्मीर पंडितों को मुस्लिम आतंकवादियों ने जिस तरह राज्य से बाहर खदेड़ा वह शर्मनाक है। जम्मू-कष्मीर के मुस्लिम सियासत दां राज्य की एक तरफ बागडोर संभाल संसाधनों की चोरी कर ऐष करते रहे दूसरी ओर उनकी सहमति से राष्ट्रभक्त मुस्लिमों की भी हत्या होती रही। इसलिए पंडित नेहरू ही घाटी में आतंकवाद के जन्मदाता है।

शंकालू – मुंषीजी, श्रीमती इंदिरा गांधी के शासनकाल में हमारे देष में आतंकवाद का कितना प्रभाव रहा?
मुंशीजी – शंकालू, इंदिरा गांधी एक कुषाग्र बुद्धि वाली नेता था। उनकी देषभक्ति पर उंगली नहीं उठाई जा सकती। उन्होंने आतंकवाद से लड़ने में पूरी निष्ठा दिखाई। लेकिन नेहरू के बोए बीज से जम्मू-कष्मीर में अलगाववाद का जो वृक्ष तैयार हो चुका था, उसे काटने में इंदिरा जी सफल नहीं हुई। उन्होंने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर पाकिस्तान को एक सबे ज़रूर सिखाया। लेकिन हमारे पंजाब में पाकिस्तान की शह पर खालिस्तानी आतंकवाद का ऐसा विकट स्वरूप उभरा जिसे नेस्तनाबूद करने के प्रयास में इंदिरा गांधी को अपना बलिदान देना पड़ा। इसलिए ये आरोप गलत है कि कांग्रेस के पूरे शासनकाल में आतंकवाद को पनपने दिया गया। आतंकियों के खिलाफ़ लड़ाई तो हमारे जवानों ने लड़ी, लेकिन इंदिरा गांधी के बाद का कांग्रेसी शासन नपुंसकता का पर्याय बना रहा। मौजूदा सरकार ने जम्मू-कष्मीर से धारा 370 हटाकर एक ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया है जिसे आने वाली पीढ़ियों याद करेगी। घाटी में आतंकवाद के खिलाफ़ हमारी लड़ाई निर्णायक दौर में है।

शंकालू – मुंषीजी, हमारे देष में आंतकवादी वारदातों के लिए पाकिस्तान के नापाक कितने जिम्मेवार है?
मुंशीजी – शंकालू, हमारे देष में आतंकवाद का पूरा संचालन पाकिस्तान से होता है। जम्मू-कष्मीर को भारत से काट देने का एजेंडा पाकिस्तान का है। वह बांग्लादेष बनने का बदला भारत से लेना चाहता है। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुर्षरफ़ तो सरेआम स्वीकार कर चुका है कि जम्मू-कष्मीर में हमला करने वाले आतंक उसके लिए आज़ादी के लड़ाके हैं। भारत अंतर्राष्ट्रीय मंच पर काफी हद तक पाकिस्तान को बेनकाब कर चुका है। हाल ही पाकिस्तान की नेषनल असेम्बली में उसके मंत्री फ़वाद हुसैन चैधरी ने यह स्वीकार किया कि फरवरी 2019 में पुलवामा विस्फोट उनकी इमरान सरकार ने करवाया था। जबकि विस्फोट के समय हमारी कांग्रेस पार्टी ने उल्टे मोदी सरकार पर आरोप लगाया था कि चुनावी लाभ के लिए यह हमला स्वयं करवाया गया। पाकिस्तान के इस खुलासे के बाद सोनिया कांग्रेस की बोलती बंद है। इस पार्टी का घृणित चेहरा सामने आ चुका है।

शंकालू – मुंषीजी, हाल ही में फ्रंास में एक टीचर की गला रेत कर हत्या करना और चर्च पर हमला कर तीन ईसाइयों को मौत के घाट उतार देना, किस ओर इषारा करता है?
मुंशीजी – फं्रास की ये घटनाएं बता रही है कि मुस्लिम कट्टरवाद का आतंकवादी राक्षस आज पूरे विष्व में फैल चुका है। जिस फ्रांस ने इन मुसलमानों को अपने देष में शरण देकर बसाया, आज पवही कट्टरपंथी, अधर्मी मुसलमान, नागरिकों का गला काटर रहे हैं। इस घटना की भारत सरकार ने कड़ी निंदा की है। लेकिन हमारे देष में रहने वाले गद्दार कट्टरपंथी सोच वाले आतंकवादियों के हिमायती मुसलमानों ने भोपाल, मुंबई सहित कई जगहों पर फं्रास के राष्ट्रपति के विरूद्ध प्रदर्षन कर यह दर्षा दिया है कि उन्हें आतंक का समर्थन हर हाल में करना है। यह हमारे देष के लिए ख़तरे की घंटी है। देखना है कि बहुसंख्यक हिन्दू समाज दलगत राजनीति के घृणित मकड़जाल से निकलने का कब प्रयास करता है। फिलहाल हिन्दू समाज टुकड़ों में बंटा हुआ नपुंसकता की चादर ओढ़े हुआ है।

शंकालू – मुंषीजी, क्या आतंकवाद का यह भयावह रूप विष्व युद्ध को आमंत्रित कर सकता है?
मुंशीजी – शंकालू, आमंत्रित कर सकता है नहीं, बल्कि कर चुका है। आर्मेनिया और अज़रबैज़ान के बीच युद्ध मुसलमानों द्वारा ईसाइयों के खिलाफ़ छेड़ा गया है। पूरी दुनिया में कट्टरपंथी सोच के तहत यह जहर बो दिया गया है कि दुनिया से ईसाइयों और अन्य धर्म के लोगांे को समाप्त करना इस्लामी आतंकवाद का लक्ष्य है। फ्रांस की घटना ने दुनिया का महाषक्तियों की आंखे खोल दी है। पूरी दुनिया इस्लामी आतंकवाद से निपटने की तैयारी में है। नास्त्रेदमस की तीसरे विष्व युद्ध की भविष्यवाणी के सच होने के आसार दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा 14वीं ईष्वी में मुसलमानों के सर्वनाष की भविष्यवाणी भी चरितार्थ होने के करीब है।

शंकालू – मुंषीजी, क्या दुनिया के सभी मुस्लिम देष दिषाहीन इस्लामी आतंकवाद के साथ है?
मुंशीजी – नहीं, ऐसी बात नहीं है। संयुक्त अरब अमीरात, सउदी अरब, कुवैत और ईरान जैसे देषों ने फ्रंास में हुए अमानवीय कृत्य की निंदा की है। हमारे देष में मुसलमानों का बड़ा तबका आतंकवाद के खिलाफ़ है। लेकिन डर के मारे ये लोग खुलकर बोल नहीं पाते। हमारे देष में विपक्षी दलों से जुड़े कट्टरपंथी मुसलमान आतंकवाद के समर्थक है। ऐसे लोग देष के गद्दार है। इनके समर्थन से ही भारत में आतंकवाद अपने भयावह चेहरे के साफ फल-फूल रहा है। बड़ी ही ख़तरनाक स्थिति है। – दुर्गविजय सिंह ‘दीप’

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