बातों-बातों मे…. हत्या, बलात्कार और सियासत

शंकालू – मुंशीजी, हमारे देष के एक नहीं उनके राज्यों में हत्या और बलात्कार की घटनाएं तेज़ी से बढ़ रही है। आप किसे जिम्मेवार मानते है?
मंुशीजी – शंकालू, तुम्हारा सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेष, राजस्थान, उडीसा, मध्यप्रदेष, छत्तीसगढ़, पंजाब आदि राज्यों में इस तरह के अपराध बढ़ते जा रहे हैं। इसके एक नहीं कई कारण है। लेकिन सबसे बड़ा कारण है राजनीतिक विद्वेष। जो राजनीतिक दल सत्ता से दूर हैं। वे ऐसी घटनाओं को गुप्त समर्थन करते हैं। सहानुभूति का ड्रामा करते हुए इन्हें वोट बैंक की फिक्र ज्यादा होती है। ये लोग हिंसा को हवा देते है और मीडिया के सामने घटना पर छाती पीटते है। इन दिनों हत्या और बलात्कार की जो भी घटनाएं हुई हैं उनमें नेताओं ने जमकर सियासत की है। हत्या के पीछे दूसरा कारण बाहुबल और धनबल है। तीसरा कारण आतंकवादी और विघटनकारी सोच है। इन पर नियंत्रण इसलिए नहीं हो पा रहा है, क्योंकि सभी राजनीतिक दल क्षुद्र स्वार्थों पर आधारित राजनीति कर रहे हैं।

शंकालू – मुंषीजी, इन बिन्दुओं को ज़रा स्पष्ट करें तो बेहतर होगा?
मुंशीजी – शंकालू, पिछले दिनों उत्तर प्रदेष, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बलात्कार और हत्या की शर्मनाक घटनाएं हुई। हाथरस में एक दलित युवती की खेत ममें बलात्कार के बाद गुंडो ने जो दुगर्ति की वह दिल दहला देने वाला है। 14 दिन मौत से लड़ने के बाद उसने दिल्ली के सफरदंग अस्पताल में दम तोड़ दिया। उसके बाद पुलिस प्रषासन ने जो नंगा नाच किया उसकी मिसाल नहीं। अपराधियों को बचाने के चक्कर में पुलिस ने आधी रात में शव का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया। इस घटना पर एक ओर तो योगी का नपुंसक प्रषासन असहाय दिखा तो दूसरी ओर कांग्रेस के राजनीतिक माॅडल राहुल और प्रियंका ने पूरी ड्रामेबाजी की। पीड़ित परिवार के घर जाकर खूब प्रपंच किया। जबकि पीड़िता दिल्ली में सफरदंग अस्पताल में कई दिनों तक मौत से लड़ती रही। लेकिन प्रियंका और राहुल वहां जाने की जहमत नहीं उठाई। घटना की निंदा तक करने का साहस नहीं दिखा सके। छत्तीसगढ़ मंे हुए बलात्कार पर उंची जाति के गुंडे दलितों पर अत्याचार करते जा रहे हैं। लाभ-हानि का खेल सारे दल खेल रहे हैं।

शंकालू – मुंषीजी, दिल्ली में एक हिन्दू युवक की मुस्लिम परिवार के लोगों ने इसलिए पीटर कर हत्या कर दी कि वह मुस्लिम परिवार की लड़की से प्रेम करता था। इस पर क्या कहेंगे?
मुंशीजी – शंकालू, यह बहुत दर्दनाक और शर्मनाक घटना है। 19 वर्षीय युवक को ट्यूषन के बहाने बुलाकर सरेआम मार देना दिल्ली प्रषासन पर सवाल उठाता है। हिन्दू लड़कियों को बरगलाकर मुसलमान बनाने वाले टुकड़े-टुकड़े गैंग के इषारे पर ही ऐसी वारदातों को अंजाम दिया जाता है। तारीफ़ तो उस मुस्लिम लड़की की करनी पड़ेगी जिसमें अपने घर वालों के खिलाफ़ खुलेआम पुलिस में बयान दिया है। उसे अपना घर छोड़कर नारी निकेतन में रहना पड़ रहा है। तथाकथित बुद्धिजीवी अब प्रेम प्रसंग पर अपनी जुबान नहीं हिला रहे हैं। ऐसी घटना प्रमाणित करती है कि बाॅलिवुड और कई मीडिया घरों के सहारे हिन्दू समाज की लड़कियों को बरगलाया जा रहा है। जब हिन्दू लड़की मुसलमान से शादी कर धर्म परिवर्तन करती है तो मुल्ला उसे जायज ठहराते हैं और जब मुस्लिम लड़की हिन्दू युवक से प्रेम करती है तो युवक को मार दिया जाता है। ताज्जुब तो इस बात की है कि कांग्रेस की राजनीतिक माॅडल प्रियंका गांधी मृत युवक के घर जाकर सहानुभूति जताने का नैतिक साहस नहीं कर पाती हैं। घृणित राजनीति का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है।

शंकालू – मुंषीजी, उत्तर प्रदेष के बलिया में कोटा परमिट आवंटन विवाद मे एक बाहुबली ने एसडीएम और पुलिस की मौजूदगी में गोली चला दी। जिसमें एक व्यक्ति मौके पर मारा गया। इस पर क्या कहेंगे?
मुंशीजी – शंकालू, इन दिनों उत्तर प्रदेष में शासन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पुलिस और नागरिक प्रषासन जिस तरह का बर्ताव कर रहा है, उससे ये संकेत मिलता है कि योगी सरकार को विफल बनाने के लिए पुलिस तंत्र और प्रषासन में विपक्षी दलों के एजेंट साजिष के तहत नकारात्मक रूख अपनाए हुए है। घटनाएं होने दी जाती है। उसके बाद पुलिस लीपापोती करती है। योगीजी क्या करें। वे पुलिस की ड्यूटी तो कर नहीं सकते। राज्य में भाजपा में भी अंदरूनी गुटबाजी से इंकार नहीं किया जा सकता। बलिया वाली घटना में गोली चलाने वाला पूर्व सैनिक है। वह स्थानीय विधायक का विष्वास पात्र है। स्थानीय विधायक की बेषर्मी ये है कि वह हत्यारे का पक्ष ले रहे हैं। इनका कहना है कि गोली आत्मरक्षा में चलाई गई। इसे कहते हैं घटिया राजनीति। भाजपा हो या कांग्रेस किसी का दामन साफ-पाक नहीं है।

शंकालू – मुंषीजी, जो राजनीति के ऐसे पतन का कारण क्या है?
मुंशीजी – शंकालू, राजनीति के पतन के लिए बदली सोच जिम्मेवार है। आज़ादी के पहले क्रांति के लिए राजनीति होती थी। लोग मानवता की रक्षा में फांसी चढ़ जाते थे। आज़ादी के बाद भी दो दषकों तक राजनीति में उस पीढ़ी के नेता थे, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में योगदान दिया था। लाल बहादुर शास्त्री जी के बाद राजनीति में सत्ता के लिए कुर्सी दौड़ का युग आरंभ हुआ, जो अपराधीकरण से होता हुआ आज गंदे खेल का रूप ले चुका है। अब अपवाद स्वरूप है। यही कारण है कि समाज में हिंसा, लूट, बलात्कार और भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है।

शंकालू – मुंषीजी, ऐसी हालत में आतंकवाद को क्या बल नहीं मिल रहा?
मुंशीजी – क्यों नहीं, बिलकुल मिल रहा है। जम्मू-कष्मीर में आतंकवाद की जड़ में वहां के कुछ राजनतिक परिवार है। जिन्होंने आतंकवाद से लड़ने का ड्रामा रचकर भारत सरकार की योजनाओं का धन डकारते रहे। दूसरी ओर पाकिस्तान से भी धन लेते रहे। धारा 370 हटने के बाद जब इन्हें जेल भेजा गया तब इनकी औकात ठिकाने आयी। डाॅ0 फारूख अब्दुला और महबूबा मुफ्ती जैसे लोग देष के गद्दार है। ये आतंकवादियों से मिले हुए है। जेल से रिया होने के बाद इन्होंने ज़हर उगलना शुरू कर दिया। जम्मू-कष्मीर में देषभक्तों की कमी नहीं है। वे भारतीय हैं। उन्हें इसी कारण आतंकवादी अपना निषाना बनाते हैं।

शंकालू – मुंषीजी, आतंकवाद और हिंसा की राजनीति को विपक्ष समर्थन दे रहा है क्या उचित है?
मुंशीजी – शंकालू, हमारे देष में स्थिति विस्फोटक है। केन्द्र सरकार ने पिछले वर्षों में कई ठोस कदम उठाए है। जम्मू-कष्मीर में आतंकवादियों का किसी हद तक सफाया हुआ है। लेकिन कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल सत्ता की गंदी राजनीति के तहत अलगाववादी ताकतों का समर्थन कर रहे हैं। अब ज़रूरत इस बात की है कि देष की ईमानदार युवाषक्ति जागरूक होकर समाज को राष्ट्रहित से जोड़े और विघटन की राजनीति करने वालों को सत्ता तक न पहुंचने दें। पंजाब में हाल ही में आतंकवाद से लड़ने वाले शौर्यचक्र विजेता की आतंकवादियों ने जिस तरह हत्या की है वह पंजाब के लिए शुभ संकेत नहीं है। जो राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव में बरोज़गारी और अन्य समस्याओं को मुद्दा बनाने का राज अलाप रहे हैं वे गंदी सियासत के तहत ऐसा कर रहे हैं। ये विपक्षी दल यदि सत्ता पा गए तो अपने यहां आतंकवादियों को शरण देंगे और उनका पोषण करेंगे। समस्या गंभीर है। राष्ट्रवादी शक्तियों की मज़बूती से ही हत्या, बलात्कार और आतंकवाद पर सियासत करने वालों को मात दी जा सकती है। – दुर्गविजय सिंह ‘दीप’

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