नील द्वीप (परी टापू)

पोर्ट ब्लेयर से 36 किलोमीटर की दूरी पर, उत्तर-पूर्व की दिशा में स्थित
नील द्वीप एक सपाट द्वीप है। यहां की भूमि कृषि के लिए अत्यंत उपयोगी है।
यही कारण है कि यहां पर धान की खेती के साथ-साथ फल एवं सब्जियां भरपूर
मात्रा में उगाई जाती है। अंग्रेजों ने अपने एक होनहार अफसर नील के नाम
पर इस द्वीप का नाम नील द्वीप रखा था लेकिन प्रचलित किवंदतिंयों के
अनुसार इसे परी द्वीप कहा जाता है क्योंकि जब भाटे के समय समुद्र जल पीछे
हटता है तो पोर्ट ब्लेयर की पहाड़ियों और घाटियों से सूर्य के प्रकाश में
यह द्वीप दर्पण जैसा चमकने लगता है। लोग इस चमकते द्वीप को नीले समुद्र
की सतह पर सफेद रंग में यह द्वीप नजर आता है। इसी लिए लोग इसे परी द्वीप
के नाम से भी जानते है। नील द्वीप में यह प्रचलित है कि एक समय में
परियां इस द्वीप पर भ्रमण करने आया करती थी। परियों की राजकुमारी को यह
द्वीप अत्यंत प्रिय था। आकाश से उतरने वाली परियों का यह टापू आज भी
विख्यात है। देश के बेहद स्वच्छ एवं सुंदरतम रेतीले तट यहीं पर है। यही
पर सीतापुर, लक्ष्मणपुर सुन्दर समुद्री तट है। यहां सन् 1960 ई. के
आस-पास पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश से हिन्दू विस्थापित हुए लोगों को
यहां पर बसाया गया था। यहां के स्थलों एवं गांवों का नाम देवी देवताओं के
नाम पर रखा गया है। वर्तमान समय में नील द्वीप अंडमान तथा निकोबार
द्वीपसमूह का एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। हैवलाॅक द्वीप पर जो भी
पर्यटक आते है वह एक बाद नील द्वीप का रुख अवश्य करते है। नील द्वीप के
लिए प्रतिदिन पोर्ट ब्लेयर से फेरी सेवाएं उपलब्ध है। ज्वार के समय यहां
कोरल का बना प्राकृतिक हाबड़ा ब्रिज जलमग्न रहता है लेकिन भोटे के समय यह
दूर तक समुद्र तट पर्यटकों को आकर्षित करता है। पर्यटक कोरल, नन्हीं
मछलियां, केकड़े और जेलफिश आदि समुद्री जीवों का साक्षात अवलोकन करते है।
पोर्ट ब्लेयर से निकट होने के कारण यहां के व्यापारी लोग कृषि उत्पादों,
फल एवं सब्जियां निजी नौकाओं से पोर्ट ब्लेयर लाते है। प्रत्येक रविवार
को पोर्ट ब्लेयर के जंगलीघाट में लगने वाले बाजार में अपने उत्पाद को
बेचते है। सब्जी बाजार में हर तरह की सब्जियां एवं फल उपलब्ध रहते है।
नील द्वीप अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह में जैविक खेती की दृष्टि से
महत्वपूर्ण स्थान है। यहां पर सभी प्रकार की आर्गेनिक सब्जियां उगाई जाती
है।

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